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हमारी संरचना | Our Field Structure

Three-Tier Field Network

Our work reaches every village through a structured three-tier system — from district-level management down to the panchayat-level frontline.

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जिला स्तर

District Level

DPM / District Pashupalan Manager

जिला पशुपालन प्रबंधक.

इनका मुख्य काम पूरे जिले में पशुपालन विभाग की परियोजनाओं, राष्ट्रीय पशुपालन स्वास्थ्य मिशन की योजनाओं और अस्पतालों के प्रबंधन की निगरानी करना होता है।

यह विभाग मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्य और योजनाएं संभालता है: • बीमारी नियंत्रण और चिकित्सा: पशुओं का मुफ्त टीकाकरण, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं देना। • सरकारी योजनाएं व लोन सब्सिडी: डेयरी फार्मिंग, पशुपालन और कुक्कुट विकास के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण (लोन) और सब्सिडी दिलाना। • चारा विकास: पशुपालकों को उन्नत किस्म के चारे के बीज उपलब्ध कराना। • नस्ल सुधार: गाय और भैंसों में कृत्रिम गर्भाधान के जरिए अच्छी नस्ल को बढ़ावा देना।

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ब्लॉक स्तर

Block Level

BAHM / Block Animal Husbandry Manager.

ब्लॉक पशुपालन प्रबंधक.

ब्लॉक पशुपालन प्रबंधक (Block Animal Husbandry Manager) का यह एक मुख्य और महत्वपूर्ण कार्य है। वे अपने ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली सभी ग्राम पंचायतों में जमीनी स्तर पर काम कर रहे पशुपालन कर्मचारियों (जैसे- पशुधन सहायक, कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता, और अन्य फील्ड स्टाफ) के कार्यों की निगरानी (Monitoring), देखरेख (Supervision) और मार्गदर्शन करते हैं।

एक ब्लॉक पशुपालन प्रबंधक के प्रमुख कार्य और जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं: 1. योजनाओं का प्रचार-प्रसार और जागरूकता • सरकारी व गैर-सरकारी योजनाओं का लाभ: ब्लॉक स्तर पर चल रही पशुपालन, पशु बीमा, डेयरी फार्म, पोल्ट्री फार्म, और बायोगैस संयंत्र जैसी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम पशुपालकों और किसानों तक पहुंचाना। • जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन: तहसील और पंचायत स्तर पर पशुओं के उचित रखरखाव, बेहतर खान-पान और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता शिविर और ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करना। 2. टीम का संचालन और पर्यवेक्षण (Supervision) • सहायकों की निगरानी: ब्लॉक प्रबंधक के अधीन कई सहायक या कार्यकर्ता (जैसे पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ता या प्रेरक) काम करते हैं। उनके कार्यों की निगरानी करना, उनके द्वारा किए गए कार्यों की रिपोर्ट लेना और उन्हें दिशा-निर्देश देना ब्लॉक प्रबंधक की जिम्मेदारी होती है। • फील्ड विजिट: ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांवों और ग्राम पंचायतों का नियमित दौरा करना ताकि जमीनी स्तर पर चल रहे कार्यों का मूल्यांकन किया जा सके। 3. पशुधन प्रबंधन और प्रशिक्षण • पशु स्वास्थ्य और पोषण: पशुपालकों को पशुओं के संतुलित आहार (Fodder), रहने के स्थान (आवास), और प्राथमिक चिकित्सा के बारे में जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करना। • व्यवसाय शुरू करने में मदद: जो ग्रामीण नया डेयरी फार्म, बकरी पालन, या मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें बैंक लोन और तकनीकी बारीकियों के बारे में मार्गदर्शन देना। 4. उत्पादों की बिक्री और व्यावसायिक लक्ष्य (Targets) • गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की उपलब्धता: पशुपालकों को उचित मूल्य पर पशु आहार, दवाइयां, और मिनरल मिक्सचर (खनिज मिश्रण) जैसी सामग्री उपलब्ध करवाना। • मासिक लक्ष्य पूरे करना: इस पद पर काम करने वाले अधिकारियों को अक्सर संस्था की ओर से कुछ मासिक लक्ष्य (जैसे मिनरल मिक्सचर पैकेट्स की बिक्री या नए पशु सेवा केंद्र खोलना) दिए जाते हैं, जिन्हें पूरा करना अनिवार्य होता है। 5. रिपोर्टिंग और रिकॉर्ड मेंटेनेंस • ब्लॉक में पशुओं की कुल संख्या, बीमारियों का प्रकोप, और योजनाओं से लाभान्वित हुए किसानों का पूरा डेटा तैयार करना और उच्च अधिकारियों (जैसे जिला प्रबंधक) को मासिक या साप्ताहिक रिपोर्ट भेजना।

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पंचायत स्तर

Panchayat Level

पशु सहायक मित्र

Pashu Sahayak Mitra

इनका मुख्य काम गांव के पशुपालकों को जागरूक करना, मवेशियों का प्राथमिक उपचार, टीकाकरण (Vaccination) और सरकारी पशुपालन योजनाओं की जानकारी सीधे किसानों तक पहुँचाना होता है।

पंचायत स्तर पर पशु सहायक मित्र (Pashu Sahayak Mitra / Pashu Mitra) ग्रामीण पशुपालन अर्थव्यवस्था की एक बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ी हैं। राज्य सरकारें (जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश आदि) अपने पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विभागों के माध्यम से समय-समय पर इस पद के लिए भर्तियां निकालती हैं ताकि जमीनी स्तर पर मवेशियों की देखभाल हो सके। इस पद का पूरा विवरण (Full Details) योग्यता, भर्ती प्रक्रिया, वेतन और कार्यों के आधार पर नीचे दिया गया है: 1. शैक्षणिक योग्यता (Eligibility / Qualification) अलग-अलग राज्यों और योजनाओं के तहत शैक्षणिक योग्यता में थोड़ा अंतर होता है: * न्यूनतम योग्यता: कम से कम 10वीं (Matric) या 12वीं (Intermediate) पास होना अनिवार्य है। * प्राथमिकता (Preferred): यदि उम्मीदवार ने विज्ञान (Biology/Science) या कृषि (Agriculture) विषय से 12वीं की है, तो उन्हें वरीयता मिलती है। * अतिरिक्त डिप्लोमा: कुछ राज्यों में पशुधन प्रबंधन (Livestock Development), पैरावेट (Para-Vet), या वेटनरी फार्मेसी में डिप्लोमा/ट्रेनिंग धारकों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। * स्थानीय निवासी: आवेदक को उसी ग्राम पंचायत का स्थायी निवासी होना चाहिए, जहां के लिए वह आवेदन कर रहा है। 2. आयु सीमा (Age Limit)* न्यूनतम आयु: 18 वर्ष * अधिकतम आयु: सामान्यतः 35 से 45 वर्ष (राज्य के नियमों के अनुसार छूट का प्रावधान रहता है)।. 3. चयन/भर्ती प्रक्रिया (Selection Process) पशु सहायक मित्र की भर्ती आमतौर पर सीधी और पारदर्शी होती है: 1. मेरिट आधारित (Merit-Based): अधिकांश राज्यों में इसके लिए कोई कठिन लिखित परीक्षा नहीं होती। चयन 10वीं या 12वीं के प्राप्तांकों (Marks Percentage) के आधार पर बनी मेरिट लिस्ट से होता है। (हालांकि, कुछ नियमित सरकारी पदों के लिए आयोग द्वारा परीक्षाएं भी आयोजित की जाती हैं)। 2. शारीरिक दक्षता (Physical Fitness): चूंकि यह फील्ड जॉब है, इसलिए उम्मीदवार का शारीरिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है। कुछ राज्यों (जैसे हिमाचल) में 25 किलोग्राम का वजन उठाकर 100 मीटर चलने जैसी बुनियादी शारीरिक जांच भी ली जाती है। 3. दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) और ट्रेनिंग: मेरिट में नाम आने के बाद दस्तावेजों की जांच की जाती है और फिर चयनित उम्मीदवारों को सरकारी केंद्रों पर पशु चिकित्सा और प्राथमिक उपचार की बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है।  4. मानदेय / वेतन (Salary / Honorarium) यह पद मुख्य रूप से मानदेय (Stipend/Honorarium) या संविदा (Contract) आधारित होता है, लेकिन कुछ राज्यों में इसके नियमित कैडर भी बनाए जा रहे हैं: * संविदा/प्रशिक्षण स्तर पर: शुरुआती मानदेय ₹5,000 से ₹10,000 प्रति माह के बीच होता है। इसके साथ ही कृत्रिम गर्भाधान (AI) या टीकाकरण करने पर अलग से इंसेंटिव (कमीशन) भी मिलता है। * नियमित/पूर्ण सेवा पदों पर: यदि भर्ती बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) जैसे बोर्ड के माध्यम से पूर्णकालिक पशु सहायक (Veterinary Assistant) के रूप में होती है, तो वेतन ₹15,000 से ₹25,000+ प्रति माह (लेवल-4 पे-स्केल) तक जाता है।   5. मुख्य कार्य और जिम्मेदारियां (Job Profile & Duties) जैसा कि आपने सही उल्लेख किया, इनका मुख्य उद्देश्य पशुपालकों और पशु चिकित्सालय के बीच एक पुल (Bridge) का काम करना है। इनके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं: * प्राथमिक उपचार (First Aid): गांव में किसी पशु के अचानक बीमार होने, चोट लगने या सामान्य समस्या होने पर डॉक्टर के आने से पहले प्राथमिक उपचार देना। * टीकाकरण (Vaccination): खुरपका-मुंहपका (FMD), गलघोंटू जैसी जानलेवा बीमारियों से मवेशियों को बचाने के लिए समय-समय पर पंचायत के सभी गांवों में मुफ्त टीकाकरण अभियान चलाना। * नस्ल सुधार (Breeding Support): उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) कार्यक्रमों में सरकारी डॉक्टरों की मदद करना। * जागरूकता फैलाना: पशुपालकों को पशुओं के सही चारे, पोषण, साफ-सफाई और दूध उत्पादन बढ़ाने के आधुनिक तरीकों के बारे में शिक्षित करना। * सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना: सरकार की डेयरी विकास, पशु लोन, बीमा योजना (जैसे गोपालक योजना, कामधेनु योजना आदि) की जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचाना और उनके फॉर्म भरवाने में मदद करना। * डेटा और रिकॉर्ड: पंचायत में कुल कितने मवेशी हैं, कितनों का टीकाकरण हुआ, इसका रिकॉर्ड स्थानीय पशु चिकित्सालय (Veterinary Hospital) को रिपोर्ट करना। क्या आप किसी विशेष राज्य (जैसे बिहार या उत्तर प्रदेश) में इस पद के लिए आने वाली आगामी वैकेंसी की तारीखों या आवेदन करने के तरीके के बारे में जानना चाहते हैं?

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Ideal for:State and central government departments, district administrations
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Ideal for:NGOs, trusts, and civil society organisations across India
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